Dr. Sunita Nayak
Dermatologist
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त्वचा पर लगने वाली चोट, खरोंच, एक्ने या अन्य किसी घाव से बनने वाला निशान कई बार स्थायी निशान बन जाता है, जिसे पर्मानेंट स्कार भी कहा जाता है। कभी-कभी यही स्कार बढ़ने लग जाती हैं और एक चर्बी की गांठ जैसा रूप धारण कर लेते हैं, जिसे केलॉइड या हाइपरट्रोफिक स्कार कहा जाता है। केलॉइड की चर्बी मोटी होती है और अक्सर इनका आकार भी बढ़ जाता है। केलॉइड ज्यादातर छाती, बांह, हाथ के ऊपरी हिस्से पर विकसित होते हैं। हालांकि, केलॉइड किस कारण से विकसित होते हैं, इस बारे में सटीक जानकारी अभी तक मिल नहीं पाई है, लेकिन ऐसा माना जाता है कि कोलेजन बनने की प्रक्रिया में किसी प्रकार की गड़बड़ी होने के कारण केलॉइड विकसित होते हैं। इस मान्यता के अनुसार जब स्किन क्षतिग्रस्त होती है, तो कोलेजन बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो जाती है और उस हिस्से पर स्कार बन जाता है। केलॉइड शुरु होने में चोट के बाद कई महीनों का समय लग जाता है और ये बहुत ही धीमी गति से कई सालों तक बढ़ते रहते हैं। केलॉइड का इलाज आमतौर पर रेटिनॉइड क्रीम, स्टेरॉयड इंजेक्शन और सर्जरी की मदद से किया जाता है।
त्वचा पर लगी चोट का निशान बढ़ना और उसमें दर्द महसूस होना केलॉइड का सबसे प्रमुख लक्षण है। साथ ही इसे छूने पर पर दर्द बढ़ना और खुजली होने जैसे लक्षण भी विकसित हो सकते हैं, लेकिन ये संक्रामक नहीं होते हैं। केलॉइड कई बार सर्जरी के बाद भी विकसित हो जाता है और यहां तक कि किसी कीट द्वारा काटने के बाद भी यह समस्या देखी जा सकती है। केलॉइड से कुछ अन्य लक्षण भी देखे जा सकते हैं जैसे -
केलॉइड के सटीक कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। हालांकि, वैज्ञानिकों का मानना है कि जब त्वचा में किसी प्रकार की चोट लग जाती है या फिर अन्य किसी कारण से कोई फुन्सी या घाव बन जाता है, तो ऐसे में उस जगह पर कोलेजन बनने की गति बढ़ जाती है। कोलेजन एक प्रका रका प्रोटीन है, जो शक्ति व संरचना प्रदान करता है। जब चोट लगने वाले हिस्से में कोलेजन बनने की प्रक्रिया तेज हो जाती है, तो इस कारण से कई बार केलॉइड बनने लगता है। अगर घाव में किसी प्रकार का कचरा या अन्य कुछ है, तो ऐसे में कोलेजन के फाइबर गलत तरीके से बिछने लगते हैं और इस कारण से कई बार गलत संरचना बनने के कारण केलॉइड विकसित हो जाता है। सामान्य त्वचा समस्याएं जो केलॉइड का कारण बन सकती हैं -
केलॉइड का निदान डर्मेटोलॉजिस्ट द्वारा किया जाता है और आमतौर पर उसे देख व छूकर ही इसका डायग्नोस कर लेते हैं। अगर डॉक्टर केलॉइड की पुष्टि नहीं कर पा रहे हैं या उसे कैंसर या अन्य किसी स्थिति पर संदेह हो रहा है, तो स्थिति की पुष्टि करने के लिए स्किन बायोप्सी की जा सकती है। जिसमें केलॉइड के ऊतकों से सैंपल ले लिया जाता है और उसकी लैब में जांच की जाती है। हालांकि, कई बार केलॉइड और हाइपरट्रोफिक स्कार के बीच अंतर पता लगाना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। लेकिन केलॉइड की तरह हाइपरट्रोफिक स्कार अपनी जगह से फैलते नहीं हैं।
ज्यादातर मामलों में केलॉइड रोकथाम करना संभव नहीं होता है, हालांकि, कुछ नियमों का पालन करके केलॉइड विकसित होने की संभावनाओं को कुछ हद तक कम किया जा सकता है। अगर कान छिदवाने के कारण केलॉइड विकसित हो गया है, तो कान में पहने गए आभूषण को तुरंत निकाल दें और उसकी जगह प्रेशर इयररिंग का इस्तेमाल करें। वहीं अगर आपको केलॉइड या हाइपरट्रोफिक स्कार विकसित होने का खतरा अधिक है, जो जितना हो सके स्किन में किसी प्रकार का कट लगने से बचा कर रखें। केलॉइड से बचाव के लिए कुछ अन्य नियम इस प्रकार हैं - अगर आप बॉडी पियरसिंग, टैटू या कोई कॉस्मेटिक सर्जरी करवाने जा रहे हैं, तो पहले स्किन पर छोटा सा टेस्ट करें ताकि रिएक्शन का पता चल पाए वहीं अगर आप कोई बड़ी सर्जरी कराने जा रहे हैं, तो सर्जन को अपनी केलॉइड सेंसिटिव स्किन के बारे में बताएं। ऐसे में डॉक्टर स्किन पर केलॉइड विकसित होने से बचाने के लिए उपयुक्त सावधानियां बरत सकते हैं। आवश्यकता पड़ने पर केलॉइड के विकसित होने से पहले ही ट्रीटमेंट तैयार किया जा सकता है, ताकि उसे बढ़ने से पहले ही नियंत्रित किया जा सके।
केलॉइड का इलाज निम्न तरीके से किया जा सकता है -