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हाइपरथायरायडिज्म (Hyperthyroidism)

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हाइपरथायरायडिज्म में थायराइड ग्रंथि अधिक मात्रा में हार्मोन बनाने लग जाती है, जिससे मेटाबॉलिज्म भी अतिसक्रिय हो जाता है। हाइपरथायरायडिज्म के कारण असाधारण रूप से शरीर का वजन कम होने लगता है और साथ ही हृदय की धड़कन भी असामान्य हो जाती हैं।

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हाइपरथायरायडिज्म क्या है

हाइपरथायरायडिज्म को ओवरएक्टिव थायराइड भी कहा जाता है, जिसमें थायराइड ग्रंथि सामान्य से अधिक मात्रा में हार्मोन बनाने लग जाती है। थायराइड हमारी गर्दन में मौजूद तितली की आकृति जैसी एक छोटी सी ग्रंथि होती है, जो प्रमुख रूप से टी3 (टेट्राआयोडोथायरोनिन) और टी4 (ट्राईआयोडोथायरोनिन) नामक हार्मोन बनाती है। हाइपरथायरायडिज्म के दौरान हार्मोन की मात्रा बढ़ने के कारण मेटाबॉलिज्म तेजी से काम करने लगता है। हालांकि, हाइपरथायरायडिज्म से ग्रस्त कुछ लोगों को लंबे समय तक किसी प्रकार के लक्षण भी दिखाई नहीं देते हैं।

हाइपरथायरायडिज्म के लक्षण

हाइपरथायरायडिज्म के लक्षण रोग की गंभीरता, व्यक्ति के शारीरिक स्वास्थ्य और इससे कौन से अंग प्रभावित हो रहे हैं आदि के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। हालांकि, इससे होने वाले आम लक्षणों में निम्न शामिल हैं -

यदि किसी को ग्रेव्स रोग के कारण हाइपरथायरायडिज्म हुआ है, तो उनकी थायराइड ग्रंथि में सूजन भी आ सकती है। थायराइड की सूजन को गोइटर (Goiter) के नाम से जाना जाता है। कुछ गंभीर मामलों में ग्रेव्स रोग के कारण आंखे लाल हो जाती हैं और पुतली बाहर की तरफ निकल जाती है जिसे ग्रेव्स ऑफ्थैल्मोपैथी के नाम से जाना जाता है। यदि आपको उपरोक्त में से कोई भी लक्षण महसूस हो रहा है या फिर आपको लगता है कि आपको थायराइड समस्या हो सकती है, तो एक बार डॉक्टर से संपर्क कर लेना चाहिए।

हाइपरथायरायडिज्म के कारण

आमतौर पर थायराइड ग्रंथि सामान्य मात्रा में टी3 और टी4 हार्मोन बनाती है, जिससे इस प्रणाली से जुड़े कार्य सामान्य रूप से होते रहते हैं। हालांकि, यदि टी4 हार्मोन सामान्य से अधिक मात्रा में रक्त में स्रावित हो जाता है, तो इससे हाइपरथायरायडिज्म रोग होने का खतरा बढ़ सकता है। हाइपरथायरायडिज्म के कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं, जिनमें प्रमुख रूप से निम्न शामिल हैं -

हाइपरथायरायडिज्म के जोखिम कारक

कुछ स्थितियां हैं, जो हाइपरथायरायडिज्म होने के खतरे को बढ़ा सकती हैं -

हाइपरथायरायडिज्म की रोकथाम

जीवनशैली में कुछ अच्छे बदलाव लाकर हाइपरथायरायडिज्म के लक्षणों को गंभीर होने से रोका जा सकता है -

हाइपरथायरायडिज्म का निदान

हाइपरथायरायडिज्म का निदान करने के लिए सबसे पहले आपका शारीरिक परीक्षण किया जाता है, जिसमें आपकी गर्दन में सूजन आदि की जांच की जाती है। साथ ही इस दौरान आपको महसूस हो रहे लक्षणों के बारे में पूछा जाता है और आपके स्वास्थ्य संबंधी पिछली सभी जानकारियां ली जाती हैं। इन सभी परीक्षणों से मिलने वाले परिणामों के अनुसार डॉक्टर हाइपरथायरायडिज्म की पुष्टि करने के लिए निम्न टेस्ट भी कर सकते हैं -

इसके अलावा मरीज को महसूस हो रहे लक्षणों के अनुसार कुछ अन्य टेस्ट भी किए जा सकते हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हाइपरथायरायडिज्म के साथ कोई अन्य रोग तो नहीं है।

हाइपरथायरायडिज्म का इलाज

हाइपरथायरायडिज्म का इलाज स्थिति की गंभीरता, लक्षण और आपकी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार किया जाता है। इसकी इलाज के विकल्पों में निम्न शामिल है -

हाइपरथायरायडिज्म की जटिलताएं

हाइपरथायरायडिज्म से कई जटिलताएं हो सकती हैं, जिनमें प्रमुख रूप से निम्न शामिल हैं -