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हाइपरटेंशन (Hypertension)

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हाई ब्लड प्रेशर को मेडिकल भाषा में हाइपरटेंशन कहते हैं। इसे हिंदी में उच्च रक्तचाप कहा जाता है। दरअसल, ब्लड प्रेशर धमनियों की दीवारों पर रक्त द्वारा लगाया गया बल होता है। हमारा हृदय ऑक्सीजन युक्त रक्त को शरीर के विभिन्न भागों में पहुंचाने के लिए रक्‍त वाहिकाओं की मदद लेता है, जिसे धमनियों के नाम से जाता है। धमनियों पर जब दबाव बढ़ जाता है तो इसे ही उच्च रक्तचाप या हाई ब्लड प्रेशर कहते हैं। यह एक सामान्‍य शारीरिक समस्‍या है, लेकिन ये समस्‍या जब बढ़ जाती है तो यह हृदय रोग और अन्‍य बीमारियों का कारण बनता है। ब्लड प्रेशर दो नंबरों से बना हुआ है जिसे सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर और डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर के नाम से जाना जाता है। सिस्टोलिक प्रेशर हृदय के धड़कने पर दबाव का माप होता है, जबकि डायस्टोलिक प्रेशर दो धड़कनों के बीच में दबाव का माप होता है। इन दोनों को ही मरकरी प्रति मिलीमीटर (mmHg) में मापा जाता है। सिस्टोलिक और डायस्टोलिक बीपी की सामान्य रीडिंग 120/80 mmHg है। उच्च रक्तचाप होने की पुष्टि तक की जाती है जब सिस्टोलिक रीडिंग 140 mmHg और डायस्टोलिक रीडिंग 90 mmHg से अधिक या बराबर होती है। वैश्विक स्तर पर, चार व्‍यक्तियों में से एक को हाइपरटेंशन है। लगभग 3 अरब 50 करोड़ लोगों का ब्‍लड प्रेशर लेवल 110-115 mmHg से अधिक है, और 87 करोड़ 40 लाख लोगों का सिस्टोलिक ब्‍लड प्रेशर 140 mmHg से अधिक है। भारत में 20 करोड़ से ज्‍यादा लोग उच्च रक्तचाप के शिकार हैं। भारत में मौजूद कुल उच्च रक्तचाप के मरीजों की अधिकांश आबादी शहरी है (शहर की कुल आबादी का 25%-30%) और ग्रामीण आबादी में 10%-20% व्‍यक्ति हाई बीपी वाले हैं।

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उच्‍च रक्‍तचाप के प्रकार

आमतौर पर सामान्य ब्‍लड प्रेशर लेवल 120/80 mmHg से कम या बराबर होता है। 120/80 और 129/89 mmHg के बीच बीपी रीडिंग वाले लोगों को प्री-हाइपरटेन्सिव माना जाता है; इन लोगों में बीपी उतना कम भी नहीं है जितना होना चाहिए मगर उच्च रक्तचाप नहीं माना जाता है। उच्च रक्तचाप के दो स्‍टेज हैं:

अगर ब्‍लड प्रेशर का स्‍तर 180/110 mmHg से अधिक है तो इस स्थिति को हाइपरटेंसिव क्राइसिस यानी उच्च रक्तचाप को संकट ग्रस्‍त माना जाता है और मरीजों को तत्काल चिकित्सा सुविधा लेने की सलाह दी जाती है।

उच्‍च रक्‍तचाप के लक्षण

उच्च रक्तचाप या हाई ब्‍लड प्रेशर को एक साइलेंट किलर के रूप में जाना जाता है; इसलिए बीपी को नियमित रूप से मापा जाना चाहिए, क्योंकि उच्च रक्तचाप में कोई चेतावनी लक्षण या संकेत नहीं होते हैं, और कई लोगों को यह पता नहीं होता है कि उन्‍हे हाइपरटेंशन है। कुछ रोगियों को उच्च रक्तचाप के बिना भी हृदय या किडनी रोग हो सकता है। उच्च रक्तचाप से जुड़े कुछ लक्षणों में शामिल हैं:

उच्‍च रक्‍तचाप का कारण और जोखिम कारक

कारण सेकेंड्री हाइपरटेंशन होने के कुछ निम्‍नलिखित कारण हो सकते हैं:

जोखिम कुछ कारक हैं जो उच्च रक्तचाप के खतरे को बढ़ाते हैं, जिनसे बचने की सलाह दी जाती है। वे जोखिम कारक जिनमें बदलाव संभव है: वे जोखिम कारक जिन्‍हें परिवर्तित नहीं किया जा सकता है:

उच्‍च रक्‍तचाप से बचाव या रोकथाम

ज्यादातर लोग साधारण जीवन शैली में बदलाव करके उच्च रक्तचाप को रोक सकते हैं:

हाई ब्‍लड प्रेशर की पहचान कैसे करें

वैसे तो शुरुआत में होने वाला हाइपरटेंशन कोई लक्षण नहीं दिखाता है। इसलिए आपको समय- समय पर अपना बीपी चेक करवाते रहना चाहिए। बीपी चेक करने के लिए आपके डॉक्टर स्फिग्मोमैनोमीटर (रक्‍तचाप मापी) और स्टेथोस्कोप का प्रयोग कर सकते है। आजकल बीपी को वेरिफाई करने के लिए इलेक्ट्रिक सेंसर भी उपलब्ध हैं। इसके साथ-साथ डॉक्टर आपका खान पान, बीपी की फैमिली हिस्ट्री और आप कितने एक्टिव रहते हैं यह सब चेक कर सकते है। मरीज को तब डायग्नाइज किया जाता है जब लगातर दो रीडिंग में उनका बीपी हाई होता रहे। इसके अलावा मरीज का ब्लड टेस्ट भी किया जाता है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं उसे किडनी या हृदय की बीमारी तो नहीं, इसी बहाने उसका डायबिटीज (शुगर लेवल) भी चेक किया जाता है। अगर आपके डॉक्टर सही से डायग्नोज करते हैं तो इससे आपका हाई बीपी कम होगा और इससे जुड़े रिस्क फैक्टर्स की संभावना भी कम होने लगेगी।

हाई ब्‍लड प्रेशर का उपचार

आपके डॉक्टर आपको कोई भी उपचार बताने से पहले कुछ फैक्टर्स जैसे आपकी उम्र, मेडिकल हिस्‍ट्री (कही आपको पहले से ही कोई बीमारी तो नहीं है), जो आप दवाइयां खा रहे है यह सब चेक करेंगे।

गंभीर हाइपरटेंशन को एक दवाई नियंत्रित नहीं कर सकती है इसलिए दो या अधिक दवाइयों को साथ में जोड़ा जाता है। दो दवाइयों को साथ में देने से साइड इफेक्ट भी कम होते हैं और आपका बीपी भी कम होता है। जिन मरीजों को कोई कंटामिटेंट बीमारी नहीं है, उन्हें निम्न दवाई सुझाई जाती है। जिन लोगों को डायबिटीज या किडनी रोग जैसी पहले से ही बीमारी हैं, उन्हें निम्न सुझावों का पालन करना चाहिए।

लाइफस्टाइल

अगर आप कुछ लाइफस्टाइल में बदलाव करते हैं तो इससे आपको दवाइयां लेने की आवश्यकता कम होगी।

इन बदलावों के साथ साथ आपको अपनी डॉक्टर द्वारा दी गई दवाइयां भी नियमित रूप से लेनी चाहिए।

हाइपरटेंशन का उपचार

बीटा ब्लॉकर : यह दवाइयां आपकी धड़कन की स्पीड और फोर्स कम करके काम करती है। डाइयूरेटिक्‍स : यह शरीर से अधिक नमक और अधिक फ्लूइड की मात्रा कम करती है। ACE इन्हिबिटर : यह उस केमिकल को सिंथेसिस होने से रोकती है जो आपकी आर्टरी वॉल्स को संकीर्ण करता है। कैल्शियम चैनल ब्लॉकर : यह दवा कैल्शियम को कार्डिएक मसल में जाने से रोकती है।

रोग का निदान और खतरे

रोग का निदान जीवनशैली में कुछ बदलाव करके और उचित दवाइयां लेकर मरीज आसानी से बीपी को नियंत्रित कर सकते हैं। बीपी को नियंत्रित न कर पाने पर रोगियों के सामने दूसरी परेशानी खड़ी हो सकती है:

जटिलताएं  अगर आप बीपी को समय पर नियंत्रित नहीं करते हैं तो उससे आपको बहुत सी मुश्किलें देखने को मिल सकती हैं जैसे :

वैकल्पिक उपचार

उच्च रक्तचाप के इलाज के लिए सप्‍लीमेंट और वैकल्पिक दवाओं का उपयोग किया जाता है। हालांकि, उच्च रक्तचाप के लिए कोई भी उपचार शुरू करने से पहले एक औषधीय चिकित्सक से परामर्श करना हमेशा बेहतर होता है। उच्च रक्तचाप के लिए कुछ वैकल्पिक उपचार इस प्रकार हैं:

तनाव कम करने के लिए कुछ उपाय तनाव को कम करने के लिए तन और मन से जुड़ी कुछ तकनीकों का सहारा लिया जा सकता है। संदर्भ:
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