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हर्पीस (Herpes)

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हर्पीस त्वचा को प्रभावित करने वाला एक प्रकार का वायरल इंफेक्शन है, जो हर्पीस सिम्पलेक्स वायरस (HSV) के कारण होता है। यह संक्रमण मुंह और जननांगों समेत त्वचा के कई हिस्सों को प्रभावित करता है। हर्पीस गंभीरता आमतौर पर इस बात पर निर्भर करती है कि इससे त्वचा का कौन सा हिस्सा प्रभावित हुआ है और उसपर प्रतिरक्षा प्रणाली क्या प्रतिक्रिया दे रही है। हर्पीस सिम्पलेक्स वायरस संक्रमित त्वचा को मात्र छूने से ही फैल जाता है और इसलिए इसकी प्रसार को रोकने के लिए इसका जल्द से जल्द इलाज कराना जरूरी होता है। जब यह वायरस त्वचा के संपर्क में आता है, तो यह उसी हिस्से में अपनी संख्या बढ़ाने लगत जाता है और इससे संक्रमण फैलना शुरू हो जाता है। इस संक्रमण के लक्षण आमतौर पर उन लोगों में गंभीर होते हैं, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। हर्पीस का अभी तक कोई स्थायी इलाज उपलब्ध नहीं हो सका है, लेकिन कुछ एंटीवायरस ट्रीटमेंट की मदद से इसके लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है। हर्पीस का जल्द से जल्द इलाज कराना जरूरी होता है और ऐसा न होने पर यह त्वचा को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।

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हर्पीस के प्रकार

हर्पीस के मुख्य रूप से दो प्रकार हैं, जिन्हें हर्पीस सिम्पलेक्स टाइप 1 (HSV 1) और हर्पीस सिम्पलेक्स टाइप 2 (HSV 2) के नाम से जाना जाता है। इनके बारे में निम्न जानकारी दी गई है -

  1. हर्पीस सिम्पलेक्स टाइप 1 - इससे आमतौर पर त्वचा पर छाले बनने लगते हैं और कुछ जननांगों पर भी हर्पीस विकसित होने लगते हैं। हालांकि, अधिकतर मामलों में हर्पीस का यह प्रकार आंखों व चेहरे को ही प्रभावित करता है।
  2. हर्पीस सिम्पलेक्स टाइप 2 - यह ज्यादातर मामलों में जननांगों को प्रभावित करता है। हालांकि, कई बार यह कमर के निचले हिस्से को भी प्रभावित कर देता है और शरीर के कई अन्य हिस्सों को भी प्रभावित कर देता है।

हर्पीस के चरण

हर्पीस सिम्पलेक्स वायरस से संक्रमित लोगों संक्रमण के निम्न चरणों से गुजरना पड़ सकता है -

  1. प्राइमरी स्टेज - यह चरण आमतौर पर वायरस के संपर्क में आने के 2 से 8 दिन के बीच में शुरू हो जाता है। इसमें त्वचा पर पानी व अन्य द्रव से भरे फफोले बनने लगते हैं। ये फफोले कई बार फूट जाते हैं और वहां पर छाले बनने लगते हैं।
  2. लेटेंट स्टेज - इस चरण में वायरस त्वचा से मेरू-रज्जु (Spinal cord) तक पहुंच जाता है और वहां पर जाकर निष्क्रिय बन जाता है। इस चरण के दौरान व्यक्ति को आमतौर पर किसी प्रकार के लक्षण महसूस नहीं होते हैं।
  3. शेडिंग स्टेज - इस चरण में भी व्यक्ति को किसी प्रकार के लक्षण महसूस नहीं होते हैं। हालांकि, इस दौरान व्यक्ति बेहद संक्रामक हो जाता है, क्योंकि वायरस उसके शारीरिक द्रवों में पहुंच जाता है।
  4. रिकरेंस स्टेज - इस चरण में आने के बाद लक्षण फिर से उभरने लगते हैं। हालांकि, इस स्टेज में फिर से विकसित होने वाले लक्षण आमतौर पर शुरुआती चरण के लक्षणों से कम गंभीर होते हैं।

हर्पीस के लक्षण

ज्यादातर लोगों में हर्पीस सिम्पलेक्स वायरस के संपर्क में आने के कुछ महीनों तक भी किसी प्रकार के लक्षण महसूस नहीं होते हैं और वहीं अन्य लोगों को सिर्फ कुछ ही दिनों में इसके लक्षण दिखने लगते हैं। हर्पीस संक्रमण से विकसित होने वाले आम लक्षणों में निम्न शामिल हैं -

इतना ही नहीं हर्पीस से संक्रमित व्यक्ति को त्वचा पर लक्षण होने के उन्हें सर्दी-जुकाम जैसे लक्षण भी विकसित हो सकते हैं। यदि आपको उपरोक्त में से किसी भी प्रकार के लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो आपके बिना किसी भी प्रकार की देरी किए जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क कर लेना चाहिए।

हर्पीस के कारण

हर्पीस आमतौर पर हर्पीस सिम्पलेक्स वायरस के दो अलग-अलग प्रकारों के कारण होता है और जननांगों, गर्भाशय ग्रीवा, चेहरा, होंठ और आँखों को प्रभावित करता है। हर्पीस प्रमुख रूप से एक संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से फैलता है, जैसे उसके साथ असुरक्षित यौन संबंध बनाना, किस करना या उसके शरीर से निकले द्रव्य पदार्थों के संपर्क में आना आदि। इसके अलावा हर्पीस सिम्पलेक्स वायरस निम्न कारणों से भी फैल सकता है -

हर्पीस के जोखिम कारक

निम्न स्थितियां हैं, जो किसी व्यक्ति को हर्पीस से संक्रमित होने का खतरा बढ़ा सकती है -

हर्पीस का निदान

हर्पीस का निदान करने के लिए डॉक्टर मुख्य रूप से त्वचा पर विकसित हुए फफोलों और छालों की जांच करते हैं। प्रभावित त्वचा को देखकर ही हर्पीस का निदान कर लिया जाता है और अक्सर किसी प्रकार के टेस्ट की आवश्यकता नहीं पड़ती है। हालांकि, अगर डॉक्टर किसी कारण से निश्चित नहीं कर पा रहे हैं, तो पुष्टि करने के लिए निम्न टेस्ट किए जा सकते हैं -

हर्पीस की रोकथाम

निम्न बातों का ध्यान रखकर हर्पीस संक्रमण से बचाव करने में मदद मिल सकती है -

हर्पीस का इलाज

हर्पीस सिम्पलेक्स वायरस से होने वाले संक्रमण का कोई स्थायी इलाज नहीं है। हालांकि, कुछ उपचार विकल्पों की मदद से हर्पीस के लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है और साथ ही शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाया जा सकता है। हर्पीस के इलाज में आमतौर पर फैमविर (Famvir), जोविरैक्स (Zovirax) और वैलट्रेक्स (Valtrex) जैसी एंटीवायरल दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, दवाओं के अलावा डॉक्टर मरीज को जननांगों और मुंह की स्वच्छता को बनाए रखने के लिए कुछ खास टिप्स भी देते हैं। साथ ही मरीज को धूम्रपान और शराब आदि का सेवन बंद करने की सलाह दी जा सकती है, क्योंकि ये लक्षणों को गंभीर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।