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काला मोतियाबिंद (Glaucoma)

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आंख में दबाव बढ़ने से होने वाली समस्याओं में से एक काला मोतियाबिंद भी है, जो आंख की ऑप्टिक नर्व को क्षतिग्रस्त कर देता है। समय के साथ-साथ इसके लक्षण गंभीर होते रहते हैं और अंत में आंख की रोशनी पूरी तरह से जा सकती है।

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काला मोतियाबिंद क्या है

ग्लूकोमा को काला मोतियाबिंद और काला मोतिया के नाम से भी जाना जाता है, जो आंख का रोग है। यह आंख में लगातार बढ़ रहे दबाव के कारण होता है, जिससे ऑप्टिक नर्व प्रभावित होने लगती है और दृष्टि संबंधी लक्षण विकसित हो जाते हैं। यह रोग किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन 60 साल की उम्र के लोगों में इसके मामले सबसे अधिक देखे जा सकते हैं।

काला मोतियाबिंद के प्रकार

ग्लूकोमा के प्रमुख रूप से चार प्रकार हैं, जो आंख में द्रव के दबाव, ऑप्टिक नर्व में क्षति और दबाव बढ़ने के कारणों पर निर्भर करते हैं। ग्लूकोमा के प्रमुख चार प्रकार निम्न हैं -

काला मोतियाबिंद के चरण

आईसीडी-10 के वर्गीकरण के अनुसार काला मोतियाबिंद को चार स्टेजों में वर्गीकृत किया गया है, जो इस प्रकार हैं -

काला मोतियाबिंद के लक्षण

काला मोतियाबिंद के अधिकतर प्रकारों में किसी प्रकार के लक्षण विकसित नहीं होते हैं। हालांकि, कुछ मामलों में आंख में मौजूद द्रव अस्थायी रूप से अत्यधिक बढ़ जाता है, जिससे आंख में दबाव बढ़ने के कारण व्यक्ति को निम्न लक्षण महसूस हो सकते हैं -

धीरे-धीरे ग्लूकोमा में आंख के एक तरफ की दृष्टि प्रभावित हो जाती है और फिर उसके बाद चारों तरफ की नजर बिगड़ने लग जाती है। इसके बाद मरीज को कुछ ऐसा प्रतीत होने लगता है, जैसे वह किसी सुरंग में देख रहा हो। इसके अलावा आंख में धुंधलापन, किसी वस्तु को देख न पाना या पढ़ने में दिक्कत जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। यदि आपको उपरोक्त में से कोई भी लक्षण महसूस होता है, तो बिना देर किए नेत्र विशेषज्ञ (ओफ्थल्मोलॉजिस्ट) के पास जाकर उचित जांच करवा लेनी चाहिए।

काला मोतियाबिंद के कारण

आंख में द्रव के कारण दबाव बढ़ना काला मोतियाबिंद विकसित होने की प्रमुख वजह है। हालांकि, आंख में द्रव जमा क्यों होता है, इसके कारण का अभी तक पता नहीं चल पाया है। कुछ सिद्धांतों के अनुसार आंख से द्रव के निकास की प्रक्रिया ठीक न होना या आंख में रक्त की आपूर्ति सही न होना दबाव बढ़ने के कारण हो सकते हैं।

काला मोतियाबिंद के जोखिम कारक

कुछ स्थितियां ग्लूकोमा होने का खतरा बढ़ा सकती हैं, जिनमें निम्न शामिल हैं -

काला मोतियाबिंद की रोकथाम

ग्लूकोमा के अंदरूनी कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है, इसलिए इसकी रोकथाम भी संभव नहीं है। हालांकि, नियमित रूप से आंखों की जांच कराते रहने से स्थिति को गंभीर होने से रोका जा सकता है। 18 से 60 साल की उम्र के लोगों को हर दो साल में एक बार अपनी आंखों की जांच करवा लेनी चाहिए, ताकि काला मोतियाबिंद को गंभीर होने से पहले ही नियंत्रित किया जा सके। वहीं 60 साल से अधिक उम्र के लोगों को हर साल में कम से कम एक अपनी आंखों की जांच करानी चाहिए।

काला मोतियाबिंद का निदान

ग्लूकोमा का निदान करने के लिए डॉक्टर सबसे पहले आपसे कुछ सवाल पूछते हैं, जिसके दौरान वे आपके द्वारा महसूस किए जाने वाले लक्षणों के बारे में पता लगाते हैं। यदि आपके परिवार में पहले किसी को ग्लूकोमा की समस्या हुई है, तो इस बारे में भी आप डॉक्टर को बता दें। ग्लूकोमा की पुष्टि करने के लिए डॉक्टर निम्न टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं -

काला मोतियाबिंद का इलाज

ग्लूकोमा का कोई स्थायी इलाज नहीं है, इसके लिए उपलब्ध इलाजों की मदद से सिर्फ आंख में हो रही लगातार क्षति को कम किया जा सकता है। ग्लूकोमा के इलाज का मुख्य लक्ष्य आंख के दबाव को नियंत्रित करना होता है, ताकि ऑप्टिक नर्व में इससे अधिक क्षति होने से रोका जाए। काला मोतियाबिंद का इलाज निम्न ट्रीटमेंट प्रोसीजरों की मदद से किया जाता है -

इसके अलावा लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए डॉक्टर आपको जीवनशैली में सुधार करने की सलाह भी दे सकते हैं। जिसमें नियमित रूप से व्यायाम, योग व मेडिटेशन करना, अच्छे आहार लेना और शरीर का वजन नियंत्रित रखना आदि शामिल है।

काला मोतियाबिंद की जटिलताएं

यदि समय पर ग्लूकोमा का इलाज शुरू न किया जाए, तो इससे निम्न जटिलताएं हो सकती हैं -

इसके अतिरिक्त ग्लूकोमा से अन्य जटिलताएं भी हो सकती हैं, जो आमतौर पर हर व्यक्ति के स्वास्थ्य व ग्लूकोमा के साथ हुई अन्य समस्याओं पर निर्भर करती हैं।