Dr. Rohit Sureka
Gastroenterologist
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अगर आप किसी ऐसे फूड का सेवन करते हैं, जिससे आपके शरीर पर रिएक्शन हो जाता है तो उसे फूड एलर्जी कहा जाता है। ऐसा इसलिए होता है जब इम्यून सिस्टम की कोशिकाएं आपके फूड में मौजूद हानिकारक तत्व की पहचान कर उसे नष्ट करने के प्रयास में जुट जाती हैं। एलर्जकि रिएक्शन पैदा करने वाले तत्व एलर्जन कहलाते हैं। फूड में मौजूद सबसे आम एलर्जन है प्रोटीन। फूड एलर्जी किसी भी उम्र में हो सकती है। हालांकि बचपन में होने वाली कुछ फूड एलर्जियां आगे चलकर खुद-ब-खुद खत्म हो जाती हैं लेकिन कुछ हमेशा आपके जीवन में बनी रहती हैं। एक्सपर्ट बताते हैं कि वे बच्चे, जो किसी एक विशेष प्रकार की फूड एलर्जी के साथ बड़े होते हैं उन्हें उसी फूड से कोई गंभीर बीमारी और कुछ विशेष प्रकार की एलर्जी हो सकती है। शोधकर्ता कहते हैं गर्भावस्था के दौरान विटामिन डी का उच्च स्तर बच्चों में फूड एलर्जी का कारण बन सकता है। 17 सप्ताह के बाद ब्रेस्ट मिल्क के अलावा ठोस आहार बच्चों के इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने का काम करता है, जिससे उन्हें फूड एलर्जी से लड़ने में मदद मिल सकती है।
आपको किसी भी फूड को खाने से एलर्जी हो सकती है फिर चाहे ये अंडे, गेहूं, मूंगफली, दूध या फिर छोले जैसी आम चीजें ही क्यों न हों। भारत में 90 फीसदी फूड एलर्जी इन्हीं सब फूड्स से संबंधित है। भारत के अलग-अलग हिस्सों, धर्मों और संस्कृति में खाए जाने वाले फूड्स के आधार पर ही ये अलग-अलग प्रकार की एलर्जी होती हैं। इनमें से कुछ प्रकार की एलर्जी हैंः 1-गेहूं और मकई से होने वाली एलर्जी 2-दूध और दूध से बने उत्पादों से होने वाली एलर्जी 3-अंडे से एलर्जी 4-मूंगफली और अखरोट, बादाम व काजू जैसे ड्राई फ्रूट से होने वाली एलर्जी
फूड एलर्जी के लक्षण इसके प्रकार पर ही निर्भर करते हैंः 1-गेहूं और मकई से होने वाली एलर्जी जब आप गेहूं और मकई वाले फूड्स खाते हैं और आपको इस तरह के लक्षण दिखाई देते हैं तो आपको ये समस्या हो सकती हैः अपच, पेट से गुड़-गुड़ की आवाज आना, पेट में दर्द और दस्त बहुत ज्यादा एसिडिटी और पेट में अल्सर हाइपरएक्टिविटी और गुस्सैल व्यवहार थकान और डिप्रेशन मांसपेशियों में दर्द और क्रैंप अस्थमा एक्जिमा (लाल, गांठ, खुजली और ड्राई स्किन) दूध और दूध से बने उत्पादों से एलर्जी ये एलर्जी उन बच्चों और व्यस्कों में बहुत आम होती है, जो गाय का दूध और दूध से बने उत्पाद जैसे आइसक्रीम, लस्सी, छाछ, चीज और दही का सेवन करते हैं। भारत में दिल्ली, बेंगलुरू, मद्रास और मुंबई जैसे शहरों में दूध से एलर्जी पाई जाती है। इन शहरों में मिल्क पाउडर और दूध के टेट्रा पैक का ज्यादा इस्तेमाल होता है, जिसकी वजह से एलर्जी होती है।
आपके शरीर पर फूड के कई तरीके के प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकते हैं लेकिन ये सभी एलर्जिक रिएक्शन हैं इसका कोई सटीक परिणाम नहीं है। फूड एलर्जी कुछ विशेष प्रकार के फूड को खाने से होने वाली एलर्जी है, जिसमें आपका इम्यून सिस्टम भी शामिल होता है। जब इम्यून सिस्टम की कोशिकाएं आपके फूड में मौजूद हानिकारक तत्व की पहचान कर उसे नष्ट करने के प्रयास में जुट जाती हैं। एलर्जकि रिएक्शन पैदा करने वाले तत्व एलर्जन कहलाते हैं। फूड में मौजूद सबसे आम एलर्जन है प्रोटीन।
अगर आपको ये महसूस हो रहा है कि आप या आपका बच्चा किसी विशिष्ट फूड को खाने के बाद एलर्जी का शिकार है तो आपको ये काम करने चाहिएः 1-तुरंत उस फूड को डाइट से हटा दें और देखें कि रिएक्शन खत्म हुआ या नहीं। 2-चेक करें कि ये रिएक्शन एलर्जी की वजह से हुआ है या नहीं। 3-एक बार जब आपको ये पता चल जाए कि आपको फूड से एलर्जी है तो ये जांच लें कि आपको कौन-कौन से फूड्स से दूरी बनानी है, जिनकी वजह से एलर्जी हो सकती है। 4-प्रोसेस्ड फूड को खरीदने से पहले लेबल पढ़ लें। किसी भी प्रोसेस्ड फूड को खाने से पहले उसमें मौजूद इंग्रीडियंट्स की जांच करें। 5-जहां भी जाएं अपनी दवा ले जाना न भूलें। 6-एक डॉक्टर से विशेष फूड्स के बारे में पूछें 7-अपनी फूड एलर्जी के बारे में अपने प्रियजनों को बताएं।
बहुत से लोगों को लगता है कि फूड एलर्जी होने पर आपकी डॉक्टरी सहायता की जरूरत नहीं पड़ेगी, खासकर तब-जब आप कुछ फूड्स को खाना छोड़ देंगे। हालांकि कुछ फूड्स को छोड़कर आप इस खतरे को कम जरूर कर सकते हैं लेकिन इसकी वजह से आप जरूरी पोषण से बच सकते हैं और ये आपके लिए खतरनाक साबित हो सकता है। डायग्नोस्टिक टेस्ट की मदद से आप इस रिएक्शन का पता लगा सकते हैं। 1-स्किन टेस्टः एक पॉजिटिव स्किन टेस्ट फूड्स से होने वाले एलर्जिक रिएक्श का पता लगा सकता है। 2-ब्लड टेस्टः कुछ विशेष स्थितियों जैसे एक्जिमा में स्किन टेस्ट करना मुश्किल हो सकता है इसलिए (Radioallergosorbent assay) और ELISA (Enzyme-linked immunosorbent assay) जैसे ब्लड टेस्ट की सलाह दी जाती है। 3-डाइट से फूड को निकालनाः कभी-कभार डॉक्टर आपको अपनी डाइट से कुछ सप्ताह तक कुछ विशेष फूड्स को बाहर रखने की सलाह दे सकता है ताकि लक्षणों को कम होते हुए देखा जा सके। ये तरीका स्किन और ब्लड टेस्ट को साथ मिलाकर अपनाया जा सकता है। 4-ओरल चैलेंजः इस टेस्ट में संदिग्ध फूड्स यानी के एलर्जी पैदा करने वाले फूड्स को कैप्सूल के रूप में दिया जाता है ताकि फूड एलर्जी का पता लगाया जा सके।
फूड एलर्जी के उपचार के लिए कुछ विशेष डाइट्स का आमतौर पर प्रयोग किया जाता है। जटिलाओं के कारण हुई आपात परेशानियां एपाइनफेरिन इंजेक्शन के उपचार से ठीक की जा सकती हैं। कुछ दवाएं और सप्लीमेंट्स की मदद से फूड एलर्जी के लक्षणों को कम किया जा सकता है। 1-क्रोमोलिन जैसे स्टैबिलाइजर का प्रयोग फूड एलर्जी के लक्षणों से राहत पाने के लिए किया जाता है। 2-विटामिन सी का प्रयोग एंटी-एलर्जिक सप्लीमेंट के रूप में किया जाता है। ये इम्यून कोशिकाओं को स्थिर करने में मदद करता है। 3-पैंटोथेनिक एसिड आमरूप से होने वाली एलर्जी से राहत पाने के लिए कभी-कभार प्रयोग किया जाता है। 4-बाकार्बोनेट नमक का इस्तेमाल पीएच असंतुलन को ठीक करने के लिए किया जाता है। 5-इम्यूनोथेरेपी का इस्तेमाल एलर्जिक लक्षणों को कम करने के लिए किया जाता है। ये तरीका कुछ विशेष प्रकार के एलर्जन को कम करने के लिए किया जाता है।
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