एक सामान्य वयस्क व्यक्ति दोनों पैरों पर शरीर का बराबर वजन डालते हुए खड़ा होता है, तो उसके पैर के तलवे के बीच में मोड़ बना होता है। हालांकि, तलवे के बीच का मोड़ व उसकी गहराई हर व्यक्ति के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। वहीं अगर बच्चों की बात करें तो उनके पैर के तलवे थोड़े सपाट हो सकते हैं। कुछ मामलों में छोटे बच्चों के पैर के तलवे का बीच वाला हिस्सा फर्श से ही मिला हो सकता है। हालांकि, बच्चों के पैर के तलवे सपाट यानी फ्लैट होना सामान्य बात है, क्योंकि उनकी 9 से 10 साल की उम्र में ही पैर के तलवे का मोड़ विकसित होते हैं। एड़ी और पैर की हड्डियों में मौजूद टेंडन और टांग के निचले हिस्से के तालमेल से पैर के मोड़ का निर्माण होता है। अगर टेंडन हड्डियों को पर्याप्त रूप से खींच लेते हैं, तो मोड़ बन जाता है और ऐसा न होने पर मोड़ नहीं बन पाता है जिससे तलवे सपाट हो जाते हैं और इस स्थिति को फ्लैट फुट कहा जाता है। फ्लैट फुट को फ्लैट फीट सिंड्रोम भी कहा जा सकता है।
फ्लैट फुट के चरण
फ्लैट फुट की स्टेज या प्रकार अलग-अलग होते हैं, जिनके अनुसार ही इसका इलाज किया जाता है। फ्लैट फुट के चरण कुछ इस प्रकार हैं -
स्टेज 1 - इसमें आमतौर पर तलवे के बीच वाले टेंडन में सूजन आ जाती है, लेकिन यह किसी प्रकार पैर से संबंधित कुरूपता से जुड़ा नहीं होता है।
स्टेज 2 - फ्लैट फुट की इस स्टेज में पैर का तलवा और अधिक स्पष्ट रूप से सपाट हो जाता है। हालांकि, यह अधिकतर एक ही पैर में देखा जाता है।
स्टेज 3 - फ्लैट फुट के तीसरे चरण में पैर में दर्द महसूस हो सकता है। इसके अलावा पैर के जोड़ों में जकड़न और गठिया जैसी समस्याएं भी देखने को मिल सकती हैं।
स्टेज 4 - सपाट पैर के इस चरण में डॉक्टर से इलाज कराने की सख्त जरूरत होती है। इसमें पैर में मौजूद आर्थराइटिस के लक्षण टखने तक पहुंच जाते हैं और साथ ही चलने में दिक्कत होने लगती है।
फ्लैट फुट के लक्षण
पैर का तलवा सपाट दिखाई देना ही फ्लैट फुट का सबसे प्रमुख लक्षण है, हालांकि, इससे निम्न लक्षण भी देखने को मिल सकते हैं -
चलने-फिरने के दौरान पैर व टखने के अंदरूनी हिस्से में दर्द महसूस होना
तेज दर्द होने के कारण दौड़ने के लिए अधिक मेहनत करना
चलने-फिरने या अन्य कोई गतिविधि करने पर दर्द होना
टखने के अंदरूनी हिस्से में सूजन आना
प्रभावित हिस्से में कहीं पर तंत्रिका दब जाने के कारण वह हिस्सा सुन्न या झुनझुनी महसूस होना
पैर के ऊपरी हिस्से में हड्डी उभरी हुई दिखाई देना और उसमें दर्द होना
सामान्य रूप से चल न पाना
डॉक्टर को कब दिखाएं?
अगर आपको लग रहा है कि आपका एक पैर फ्लैट हो गया है, तो यह किसी अंदरूनी समस्या का लक्षण हो सकता है और ऐसे में डॉक्टर से बात कर लेनी चाहिए। साथ ही उपरोक्त में से किसी भी प्रकार के लक्षण होना या अन्य किसी कारण से आपको महसूस हो रहा है कि आपको फ्लैट फुट की समस्या है, तो ऐसे में भी डॉक्टर से बात कर लेनी चाहिए।
फ्लैट फुट के कारण
निम्न स्थितियां फ्लैट फुट का कारण बन सकती हैं -
टार्सल कोएलिशन - यह समस्या आमतौर पर बचपन में ही विकसित होती है और जिसमें हड्डियां का असामान्य जुड़ाव होने के कारण बच्चे का पैर कठोर व फ्लैट बन जाता है।
टिबियालिस पोस्टीरियर या टेंडन डिस्फंक्शन - इस स्थिति में टखने का एक बड़ा टेंडन खराब हो जाता है, इस कारण से टेंडन का आकार बढ़ जाता है या वह सामान्य रूप से काम करना बंद कर देता है।
शरीर का वजन बढ़ना - अगर किसी व्यक्ति के शरीर में वजन अधिक बढ़ गया है तो उसके पैरों पर अधिक वजन पड़ने लगता है और इस कारण से भी फ्लैट फुट की समस्या हो सकती है।
आर्थराइटिस - यह रोग आमतौर पर पैर के पिछले या बीच वाले हिस्से में होता है। यह काफी दर्दनाक स्थिति हो सकती है।
गर्भ दोष - गर्भ में पल रहे भ्रूण का पैर सही तरीके से विकसित न होना भी फ्लैट फुट का कारण बन सकता है।
अधिक स्ट्रेच होना - चोट लगने, मोटापे, बढ़ती उम्र या अन्य किसी कारण से पैर के ऊतक स्ट्रेच होने लग सकते हैं और इस कारण से फ्लैट फुट हो सकता है।
इसके अलावा कोई भी अन्य ऐसी स्थिति जो जोड़ों, हड्डियों, तंत्रिकाओं या मांसपेशियों को प्रभावित करती हैं, उनके कारण भी फ्लैट फुट की समस्या हो सकती है।
फ्लैट फुट के जोखिम कारक
कुछ अन्य स्थितियां भी हैं, जो फ्लैट फुट होने के खतरे को बढ़ा सकती हैं जैसे -
हड्डी टूटना (फ्रैक्चर)
अकिलिस टेंडन में चोट लगना
सेरेब्रल पाल्सी
डायबिटीज
हाई ब्लड प्रेशर
मोटापा
डाउन सिंड्रोम
गर्भावस्था
रूमेटाइड अर्थराइटिस
फ्लैट फुट का निदान
फ्लैट फुट का निदान निम्न तरीके से किया जाता है -
मरीज व उसके परिवार की मेडिकल हिस्ट्री जानना
दोनों पैरों की जांच करना और उनकी आपस में तुलना करना
अर्थराइटिस की जांच करना
एक्स रे, एमआरआई व अन्य इमेजिंग स्कैन
फ्लैट फुट की रोकथाम
निम्न बातों से फ्लैट फुट होने से बचाव किया जा सकता है -
पैरों की देखभाल करना
पैर को चोट लगने से बचाना
डायबिटीज को नियंत्रित रखना
शरीर का वजन कम करना (अगर मोटापा है तो)
फ्लैट फुट का इलाज
फ्लैट फुट का इलाज आमतौर पर सर्जिकल व नॉन-सर्जिकल प्रोसीजर के साथ किया जा सकता है, जिनमें निम्न शामिल है -
फ्लैट फुट का नोन सर्जिकल उपचार
फ्लैट फुट के इलाज के रूप में इनसोल या फिजियोथेरेपी का इस्तेमाल करना
कुछ स्थितियों में सर्जरी के साथ-साथ भी फ्लैट फुट का इस्तेमाल किया जा सकता है
फ्लैट फुट के लिए सर्जिकल उपचार
अगर फ्लैट फुट की समस्या गंभीर हो गई है या फिर नॉन-सर्जिकल ट्रीटमेंट काम नहीं कर पा रहे हैं, तो निम्न सर्जरी प्रोसीजर की मदद ली जा सकती है -