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कंप्यूटर विजन सिंड्रोम (Computer Vision Syndrome)

Dr Janak Shah
Eye surgeon, Pediatric opthalmologist

verified
Read in: English

कंप्यूटर विजन सिंड्रोम आंख और दृष्टि को प्रभावित करने वाला एक ऐसा विकार है, जो ज्यादातर शहरी आबादी में देखा जा रहा है जो आमतौर पर ज्यादातर टाइम लैपटॉप या कंप्यूटर पर बिताते हैं। कंप्यूटर स्क्रीन को देखने के लिए आपकी आंखों के बहुत मेहनत करनी पड़ती है और उन पर बहुत जोर पड़ता है। कंप्यूटर स्क्रीन को देखना किसी सामान्य वस्तु को देखने जैसी कोई सामान्य स्थिति नहीं है। कंप्यूटर विजन सिंड्रोम आमतौर पर दृष्टि से संबंधित लक्षण पैदा होते हैं, जो आमतौर पर आंखों को आराम देने पर ठीक हो जाते हैं। हालांकि, कई बार कंप्यूटर विजन सिंड्रोम का इलाज कराना जरूरी होता है और ऐसा न करने पर कुछ मामलों में लक्षण लगातार गंभीर होते रहते हैं और व्यक्ति को कई प्रकार की समस्याएं होने लगती हैं।

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कंप्यूटर विजन सिंड्रोम के लक्षण

कंप्यूटर विजन सिंड्रोम से आमतौर पर आंखों से जुड़े लक्षण पैदा होते हैं, जिनमें प्रमुख रूप से निम्न शामिल हैं -

इसके अलावा आंखों से संबंधित कुछ अन्य लक्षण भी हो सकते हैं, जैसे - कंप्यूटर विजन सिंड्रोम से होने वाले लक्षण आमतौर पर कुछ ही समय के लिए होते हैं और कंप्यूटर स्क्रीन देखना बंद करने के बाद धीरे-धीरे ठीक होने लगते हैं। हालांकि, कुछ स्थितियों में कंप्यूटर विजन सिंड्रोम के दौरान विकसित हुए कई लक्षण आमतौर पर लंबे समय तक दिखने लग जाते हैं।

डॉक्टर को कब दिखाएं?

आंख शरीर के सबसे संवेदनशील, नाजुक और महत्वपूर्ण अंगों में से एक है और इसकी नियमित रूप से देखभाल करना बेहद जरूरी होता है। वैसे तो कंप्यूटर विजन सिंड्रोम से संबंधित अधिकतर लक्षण अपने आप ही ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ लक्षण ठीक नहीं होते हैं और इसलिए डॉक्टर से बात करना जरूरी होता है। अगर आपको स्क्रीन देखने के बाद आंखों में किसी प्रकार की समस्या महसूस होती है या फिर आपको उपरोक्त में से कोई भी लक्षण दिख रहे हैं, तो ऐसे में नेत्र-रोग विशेषज्ञ से बात कर लेनी चाहिए।

कंप्यूटर विजन सिंड्रोम के कारण

किसी प्रिंट किए हुए पेज को देखना और कंप्यूटर की स्क्रीन को देखने में अंतर होता है। इनमें अंतर यह होता है कि कंप्यूटर स्क्रीन पर दिखने वाले अक्षर इतने साफ व स्पष्ट नहीं होते हैं, जितने की पेज पर प्रिंट हुए अक्षर और यही कारण है कि आंखों को उन्हें देखने में जोर पड़ता है। इसके अलावा अक्षर और बैकग्राउंड का कॉन्ट्रास्ट (विषमता) कम होता है और साथ ही स्क्रीन से निकलने वाली ग्लेयर और रिफ्लेक्शन आंखों के लिए उन अक्षरों को देखने और पढ़ना और मुश्किल बना देती है। वहीं स्क्रीन और आंखों के बीच की दूरी व कोण (एंगल) स्थिति को और खराब बनाते हैं। यहां तक कि आंख में हुई छोटी सी समस्या भी लंबे समय से कंप्यूटर का इस्तेमाल करने से बड़ी समस्या बन सकती है। आंखों की समस्या के साथ-साथ कंप्यूटर या लैपटॉप का इस्तेमाल करते समय हम जिस शारीरिक मुद्रा का इस्तेमाल करते हैं, उसके कारण मांसपेशियों में ऐंठन, गर्दन, कंधें और पीठ में दर्द जैसी समस्याएं होने लगती हैं। निम्न स्थितियां कंप्यूटर विजन सिंड्रोम का कारण बन सकती हैं -

कंप्यूटर विजन सिंड्रोम के जोखिम कारक

ऑफिस में काम करने वाले अधिकतर लोग कंप्यूटर पर ही काम करते हैं। इन लोगों में से जो लोग 2 घंटे या उससे अधिक समय को कंप्यूटर स्क्रीन के आगे बिताते हैं, तो उन्हें यह सिंड्रोम होने का खतरा है। कंप्यूटर विजन सिंड्रोम के जोखिम कारकों में निम्न भी शामिल हैं -

कंप्यूटर विजन सिंड्रोम का निदान

कंप्यूटर विजन सिंड्रोम के लक्षणों की जांच करने के लिए मरीज का शारीरिक परीक्षण किया जाता है और उनसे उनके स्वास्थ्य के बारे में पिछली जानकारियां भी ली जाती हैं। साथ ही आपके कुछ सवाल भी पूछे जा सकते हैं, जो आमतौर पर आपके द्वारा पहले से ली जा रही दवाओं, आपकी जीवनशैली और पहले से मौजूद किसी बीमारी से संबंधित होते हैं। विजुअल एक्युइटी टेस्ट भी किया जा सकता है। आपकी नजर के लिए उचित नंबर के चश्मे का पता लगाने के लिए रेफरेक्टिव टेस्टिंग भी की जा सकती है। आपकी आंखें एक साथ कैसे काम कर पा रही हैं और फॉकस कर पा रही हैं, आदि की जांच करने के लिए कॉम्प्रिहेन्सिव आई टेस्टिंग भी की जा सकती है।

कंप्यूटर विजन सिंड्रोम की रोकथाम

सामान्य चीजों का ध्यान रखकर कंप्यूटर विजन सिंड्रोम होने से बचाव किया जा सकता है। अगर सामान्य देखभाल करने के बाद भी कंप्यूटर विजन सिंड्रोम के लक्षण दिखाई देते हैं, तो नेत्र रोग विशेषज्ञ से बात कर लेनी चाहिए। कंप्यूटर विजन सिंड्रोम से बचाव आमतौर पर वातावरणीय बदलावों और आत्म देखभाल की मदद से किया जा सकता है, जो निम्न हैं -

वातावरणीय बदलाव

  1. रोशनी - कंप्यूटर स्क्रीन की ब्राइटनेस और कमरे को रोशनी को आंखों के अनुकूल रखें। ग्लेयर रिडक्शन फिल्टर का इस्तेमाल करें और साथ ही आप स्पेशल लेंस की मदद से ब्लू लाइट के प्रभाव को कम कर सकते हैं।
  2. शारीरिक मुद्रा - सही कुर्सी का इस्तेमाल करें और कंप्यूटर पर काम करते समय सही शारीरिक मुद्रा बनाकर रखें ऐसा करने से भी अन्य स्वास्थ्य समस्याएं होने का खतरा कम रहता है और साथ ही कंप्यूटर विजन सिंड्रोम होने से रोकथाम करने में भी मदद मिलती है।
  3. दूरी - कंप्यूटर स्क्रीन और आपकी आंखों के बीच की दूरी कम से कम 35 से 40 इंच होनी जरूरी है और ऐसा करने से भी आंखों पर पड़ने वाले जोर को कम किया जा सकता है।

आत्म देखभाल

कंप्यूटर विजन सिंड्रोम का इलाज

अधिकतर मामलों में आंख की घरेलू देखभाल करने, बार-बार पलक झपकाने की आदत डालने, जीरो नंबर का चश्मा लगाने और अन्य कई तरीकों से कंप्यूटर विजन सिंड्रोम के लक्षणों को कम किया जा सकता है। अगर आपकी आंखों में सूखेपन की दिक्कत है, तो आर्टीफीशियल टियर का इस्तेमाल करें। हालांकि, अगर इन सामान्य उपायों से कंप्यूटर विजन सिंड्रोम के लक्षण कम नहीं हो पा रहे हैं, तो ऐसे में विजन थेरेपी की आवश्यकता पड़ सकती है। इस थेरेपी में कुछ विशेष प्रकार की ट्रेनिंग दी जाती हैं, जिनकी मदद से दृष्टि की क्षमता को बढ़ाया जाता है।