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हैजा (Cholera)

Dr. Santosh Palve
Gastroenterologist

verified
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हैजा (कॉलरा) दस्त यानी डायरिया का एक खास रूप है, जो आमतौर पर विब्रियो कॉलेरी बैक्टीरिया के कारण होता है। हैजा के मामले भारतीय उपमहाद्वीप, इंडोनेशिया, फिलीपींस और लैटिन अमेरिका के कुछ हिस्सों में पाया जाता है। यह इन देशों में यात्रा करने वाले लोगों को भी प्रभावित कर सकता है। यह रोग आमतौर पर दूषित पानी और भोजन से फैलता है। जब हैजा से ग्रस्त व्यक्ति के मल-मूत्र का निपटान सही ढंग से न किया जाए तो इससे जल के स्रोत दूषित होने का खतरा बढ़ जाता है। खुले में शौच करने के कारण अक्सर जल स्रोत दूषित हो जाते हैं और हैजा जैसे रोग फैलने लगते हैं। विब्रियो कॉलेरी बैक्टीरिया शरीर में ऐसे विषाक्त पदार्थ छोड़ता है, जिससे दर्द रहित दस्त लगने लग जाते हैं। साथ ही कुछ लोगों को दस्त के साथ उल्टी की समस्याएं भी हो सकती हैं। दस्त के कारण शरीर में पानी की कमी होने लगती है और इसके कारण हल्का बुखार, बदन दर्द, पेट में दर्द, मांसपेशियों में ऐंठन, थकान, अधिक प्यास लगना व त्वचा की लचीलता कम होना आदि लक्षण महसूस होने लगते हैं।

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हैजा के लक्षण

कई बार हैजा से कोई भी लक्षण महसूस नहीं होता है जबकि कुछ मामलों में अत्यधिक गंभीर दस्त लगने जैसे लक्षण देखे जा सकते हैं। हैजा से ग्रसित हर 10 में से 1 व्यक्ति में गंभीर लक्षण देखे गए हैं। हैजा से ग्रस्त लोगों को दस्त के दौरान दर्द नहीं होता है और कुछ मामलों में दस्त के साथ-साथ उल्टी जैसे लक्षण देखे जा सकते हैं। विब्रियो कॉलेरी बैक्टीरिया के संपर्क में आने के कुछ घंटों से पांच दिनों के भीतर हैजा के लक्षण विकसित होने लगते हैं। हैजा के कारण होने वाले अन्य लक्षणों में आमतौर पर निम्न शामिल हैं -

डॉक्टर को कब दिखाएं? हैजा से कई बार किसी भी प्रकार के लक्षण नहीं होते हैं, इसलिए अगर आप आपको लगता है कि आप हैजा से संक्रमित हो सकते हैं, तो समय-समय पर डॉक्टर से जांच कराते रहें। वहीं अगर आपको उपरोक्त में से कोई भी लक्षण महसूस हो रहा है, तो डॉक्टर से इस बारे में बात कर लेनी चाहिए।

हैजा के कारण

कॉलरा एक एक्यूट बैक्टीरियल इंफेक्शन है, जो विब्रियो कॉलेरी नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। यह बैक्टीरिया शरीर में एक खास प्रकार का विषाक्त पदार्थ बनाता है, जिसके कारण दर्द रहित दस्त लग जाते हैं। हैजा के दौरान लगने वाले दस्त में अधिकतर पानी ही होता है। हैजा का कारण बनने वाला यह बैक्टीरिया आमतौर पर दूषित पानी व भोजन से फैलता है। बरसात के दिनों में सीवर भर जाने और जगह-जगह पानी जमा होने के कारण हैजा जैसे रोगों के मामले बढ़ जाते हैं। विब्रियो कॉलेरी आमतौर पर हैजा से ग्रसित व्यक्ति के मल में पाया जाता है और जब इस मल का निपटान सही तरीके से न किया जाए तो इससे पानी के स्रोत दूषित होने का खतरा बढ़ जाता है। अगर किसी न किसी कारण से हैजा से ग्रसित व्यक्ति का मल पानी के संपर्क में आ जाता है, तो पानी दूषित हो जाता है और इसे पीने वाला व्यक्ति भी हैजा का शिकार हो जाता है। हैजा के ज्यादातर मामले अफ्रीका, भारत, बांग्लादेश, मेक्सिको, दक्षिण अमेरिका और मध्य अमेरिका जैसे देशों में देखे जाते हैं।

हैजा के जोखिम कारक

हैजा के मामले उन हिस्सों में अधिक देखे जाते हैं, जहां पानी व सीवेज से संबंधित उचित सुविधाएं नहीं हैं। निम्न लोगों में हैजा के बैक्टीरिया के संपर्क में आने का खतरा अधिक रहता है -

हैजा का निदान

अगर कोई व्यक्ति ऐसी जगह यात्रा करके आया है जहां पर हैजा का खतरा अधिक है और उसे दस्त संबंधी समस्या हो रही हैं, तो ऐसे में डॉक्टर को हैजा का निदान करने के लिए पर्याप्त संकेत मिल जाते हैं। इसके अलावा हैजा के निदान की पुष्टि करने के लिए मरीज के लक्षणों की जांच करने के साथ-साथ डॉक्टर ब्लड या स्टूल सैंपल लेकर उसकी जांच भी कर सकते हैं। ऐसी जगहों पर जहां हैजा के मामले अधिक हैं और उसके जांच के लिए लैब की कमी है, तो वहां पर डिपस्टिक टेस्ट का इस्तेमाल किया जाता है। जिसकी मदद से मल में हैजा के बैक्टीरिया की जांच की जाती है और यह टेस्ट आमतौर पर सटीक पाया जाता है। अगर 5 साल ऊपर के किसी भी मरीज को गंभीर दस्त हो रहे हैं और उस हिस्से में हैजा के ज्यादा मामले भी नहीं हैं, तो भी डॉक्टर हैजा के लिए उचित जांच कर सकते हैं।

हैजा की रोकथाम

हैजा से बचने के उपाय के रूप में निम्न बातों का ध्यान रखा जा सकता है -

हैजा का इलाज

हैजा का इलाज करने के लिए आमतौर एंटीबायोटिक दवाओं के अलावा मरीज के शरीर में पानी की पूर्ति के लिए अन्य पेय पदार्थ भी दिए जाते हैं। अगर किसी व्यक्ति के शरीर में 5 से 10 प्रतिशत पानी की कमी हो गई है, तो उसे ओआरएस (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) दिया जाता है। हैजा की गंभीरता के आधार पर मरीज को नसों के माध्यम से भी आवश्यक तरल पदार्थ दिए जा सकते हैं। जब व्यक्ति के शरीर में पानी की पूर्ति हो जाती है, तो डॉक्टर एंटीबायोटिक दवाएं शुरू करते हैं। हैजा के दौरान दी जाने वाली एंटीबायोटिक दवाएं सिर्फ संक्रमण से लड़ने में मदद करती हैं और अगर व्यक्ति के शरीर में पानी की कमी है, तो ऐसे में ये दवाएं मरीज की मृत्यु के खतरे को कम करने में मदद नहीं करती हैं। हैजा के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली एंटीबायोटिक दवाओं में आमतौर पर डॉक्सीसाइक्लिन व टेट्रासाइक्लिन दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। हैजा से ग्रसित 5 साल से कम उम्र के बच्चों को इलाज के साथ-साथ जिंक सप्लीमेंट भी दिए जा सकते हैं। जिंक की मदद से पानी वाले दस्त को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है और साथ ही यह भविष्य में दस्त लगने की स्थितियों को रोकने में भी मदद करता है।

हैजा की जटिलताएं

हैजा के कारण लगने वाले दस्त कई बार इतने गंभीर हो जाते हैं कि मरीज के शरीर में पानी की कमी हो जाती है। पानी की कमी होने के कारण व्यक्ति के शरीर में इलेक्ट्रोलाइट कम हो जाते हैं और इसके परिणामस्वरूप रक्त में कमी होने लगती है। इस स्थिति को हाइपोवॉल्मिक शॉक कहा जाता है, जिसके कारण ब्लड प्रेशर कम होने के साथ-साथ शरीर में ऑक्सीजन की कमी भी हो सकती है। शरीर में पानी की कमी होने के कारण कई बार शरीर के कई अंग काम करना बंद कर देते हैं और यहां तक की मरीज की मृत्यु भी हो जाती है।