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गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर (Cervix cancer)

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गर्भाशय ग्रीवा (Cervix) गर्भाशय का नीचे वाला (छोटा) हिस्सा होता है, जो योनी से जुड़ा होता है। गर्भाशय ग्रीवा यानी सर्विक्स में होने वाले कैंसर को गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर यानी सर्विक्स कैंसर कहा जाता है। साथ ही इसे सर्वाइकल कैंसर (Cervical Cancer) के नाम से भी जाना जाता है। यह कैंसर पैपिलोमा वायरस (HPV) नामक वायरस के कारण होता है जो यौन संबंधों के माध्यम से फैलता है। अच्छी तरह से सफाई न रख पाना, ज्यादा बच्चे पैदा करना और पोषक तत्वों की कमी होने जैसे ऐसे कई कारक हैं, जो गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर का कारण बन सकते हैं। किशोरावस्था में यौन संबंध बनाना, कई बार गर्भधारण करना और असुरक्षित तरीके से यौन संबंध बनाना गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर होने का खतरा बढ़ाने वाले कारक है। लंबे समय तक सर्वाइकल कैंसर से किसी प्रकार के लक्षण पैदा नहीं होते हैं और जब कैंसर आस-पास के ऊतकों में फैलने लग जाता है, तो इससे योनी से खून आना, वेजाइनल डिस्चार्ज बढ़ना और पेल्विस में दर्द जैसे लक्षण विकसित हो जाते हैं। सर्जरी व अन्य कई उपचार विकल्पों की मदद से इस स्थिति का इलाज किया जा सकता है।

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गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर के लक्षण

कैंसर विकसित होने से ठीक पहले और कैंसर के शुरुआती चरणों में किसी प्रकार के लक्षण विकसित नहीं हो पाते हैं। हालांकि, जब कैंसर बढ़ जाता है और आसपास के ऊतकों में फैलना शुरू कर देता है, तो उस दौरान निम्न लक्षण विकसित हो सकते हैं जैसे -

हालांकि, उपरोक्त लक्षण सिर्फ कैंसर का ही नहीं कई प्रकार के संक्रमणों व अन्य समस्याओं का संकेत भी देते हैं। इसलिए यदि आपको इनमें से कोई भी लक्षण महसूस हो रहा है, तो जल्द से जल्द डॉक्टर से इसकी जांच कराएं।

गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर का कारण

सर्वाइकल कैंसर भारत की महिलाओं में काफी आम प्रकार का कैंसर बन चुका है। ह्यूमन पैपिलोमा वायरस से होने वाला संक्रमण भी गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर का एक कारण है और इसमें सर्वाइकल कैंसर योनी और गर्भाशय के बीच वाले हिस्से में विकसित होता है। सर्वाइकल कैंसर अधिकतर उन महिलाओं में पाया जाता है, जो कम उम्र में ही यौन रूप से सक्रिय हो जाती हैं। साथ ही अधिक बच्चों को जन्म देना या एक से अधिक यौन साथी होना भी सर्वाइकल कैंसर होने के खतरे को बढ़ा देता है।

सर्वाइकल कैंसर के जोखिम कारक

गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर होने के प्रमुख जोखिम कारकों में निम्न शामिल हैं -

गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर का निदान

सर्वाइकल कैंसर विकसित होने से पहले की स्टेज को प्रीकैंसरस स्टेट (Precancerous State) कहा जाता है। गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर के मामलों में यह अवधि लगभग दस साल या उससे भी ज्यादा होती है और इस दौरान पैप स्मीयर (Pap Smear) टेस्ट की मदद से कैंसर होने के खतरे का अंदाजा लगाया जा सकता है। यौन सक्रिय महिलाओं को हर तीन साल में एक बार पैप स्मीयर कराने की सलाह दी जाती है। यदि एचपीवी टेस्ट नेगेटिव है और पैप स्मीयर भी नॉर्मल है, तो हर पांच साल में एक बार ये टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है। गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर का समय से पहले ही पता लगाना काफी आसान है और कैंसर को विकसित होने से पहले ही इसके लिए उचित इंतजाम करके इसे रोका जा सकता है और ऐसा समय-समय पर जांच कराके ही किया जा सकता है। साथ ही समय पर जांच कराकर अन्य कई प्रकार के रोगों व संक्रमणों को भी समय पर नियंत्रित किया जा सकता है।

गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर की रोकथाम

समय-समय पर जांच कराते रहना और यौन अंगों की उचित सफाई रखना ही गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर को विकसित होने से रोकने का सबसे अच्छा तरीका है। हालांकि, निम्न बातों का ध्यान रखकर भी सर्वाइकल कैंसर होने के खतरे को कुछ हद तक कम किया जा सकता है -

गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर का इलाज

गर्भाशय ग्रीवा के प्रभावित हिस्सों का इलाज गाइनेकोलॉजिस्ट द्वारा साधारण उपचार विकल्पों से ही किया जा सकता है। गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर के इलाज के लिए उपलब्ध उपचार विकल्पों में प्रमुख रूप से निम्न शामिल हैं -

गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर की जटिलताएं

अगर गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर का समय पर इलाज न किया जाए तो यह गंभीर हो सकता है और कई बार इसका इलाज करना भी मुश्किल हो सकता है। यदि सर्वाइकल कैंसर फैलने लग जाता है, तो इससे जानलेवा स्थितियां भी पैदा हो सकती हैं। एक स्टडी के अनुसार भारत में सर्वाइकल कैंसर के कारण होने वाली मौतों का आंकड़ा ब्रेस्ट कैंसर से होने वाली मौतों से भी ज्यादा है।